yantra and mahayogi

यन्त्र और महायोगी

posted Jun 14, 2011, 8:11 AM by Site Designer   [ updated Jun 14, 2011, 9:15 AM ]

                                                        यंत्रेश्वर महायोगी 
अध्यात्म की गूढता का द्योतक है यन्त्र विद्या, यन्त्र केवल आकृति भर ही नहीं होता, बल्कि यन्त्र तो स्वयं में ही देवता होता है, यन्त्र विद्या गूढ़ विद्या है और उतनी ही सिद्ध विद्या भी, कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज कहते हैं कि "अंक महाविद्याओं और ब्रहमांड में निहित समय के प्रतिनिधि होते हैं, वे अपने भीतर ईश्वरीय रचना का सारा ज्ञान छुपाये हुए होते हैं, ठीक वैसे ही रेखाएं गति का प्रतीक होती हैं, त्रिभुज शिव शक्ति आदि के व चौकोण आदि तत्वों के प्रतीक होते हैं, जब इन सबको परस्पर जोड़ा जाता है तो एक विशेष शक्ति का यन्त्र बनता है जो एक रहस्य विद्या और गूढार्थ को अपने में समाये होता है, जिसे समझना ही देवता की सिद्धि होती है" स्वयं महायोगी जी नें अनेक दुर्लभ यंत्रों का निर्माण किया है, गुरु सान्निध्य में यन्त्र विद्या के मर्म को जाना है, कोई भी शक्ति हो वो यंत्रमयी अवश्य होती है, केवल उसका रहस्य ज्ञात होना चाहिए, यन्त्र की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है, यन्त्र निर्माण की विशेष बिधि होती है व काल विशेष में नियमों का पालन करते हुए यन्त्र निर्माण किया जाता है,

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