सूर्य योग और महायोगी

posted Sep 28, 2011, 4:17 AM by Site Designer   [ updated Sep 28, 2011, 4:37 AM ]
एक योगी की कुशलता का पता इस बात से ही चल जाता है की वो एक सूर्य योगी हो गया है. वो सूर्य से उर्जा पाता है. अपनी आध्यात्मिक शक्तियों के जागरण में भी सूर्य की उर्जा का प्रयोग करता है. सूर्य से तेज प्राप्त कर कुण्डलिनी जागरण की अनेकों क्रियाओं को संचालित किया जाता है. बिना सूर्य योग के कोई भला वनस्पति रहित हिमालय में कैसे रह पायेगा? सूर्य विज्ञानं के कई रूप है और कई शाखाएं. परम तेजस्वी महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज को कौल संप्रदायानुसार सूर्य योग की तंत्रमय योग पद्धति प्राप्त हुई है. जो बेहद रोचक है और देखने में भी बड़ी ही विचित्र. साधारण से साधारण व्यक्ति भी यदि महायोगी जी के आशीर्वाद से सूर्य योग की साधना आरम्भ करे तो वो सिद्ध हो सकता है. सार में इस विद्या के प्रारम्भ में आगया चक्र का जागरण किया जाता है और आज्ञा चक्र से ही सूर्य का प्रकाश भीतर लेने का प्रयास किया जाता है. सुबह और शाम दोनों समय अभ्यास करने वाला भूख प्यास को जीत लेता है. इन्द्रियों पर नियंत्रण प्राप्त करने लगता है. उसकी वाह्य ऊर्जा अंतर्मुखी हो जाती है. महायोगी जी के सान्निध्य में बहुत से ब्रिद्ध सन्यासियों नें इसे सीखा. कभी कभी मेरी भी नजर पड़ जाया करती थी. तो मन में कई सवाल भी उठाते, तो एक दिन साहस कर महायोगी जी को पूछ लिया कि बूढों को ये सब जटिल विद्याएँ क्यों सिखा रहे हैं. इन लोगों की आयु अब ज्यादा शेष नहीं हैं. तो महायोगी जी मुस्कुराते हुए बोले, इनको ही तो इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है. क्योंकि ज्यादा देर मल मूत्र त्यागे बिना और भोजन बिना ये साधना और अभ्यास नहीं कर पायेंगे. ऐसे में कम समय में ज्यादा से ज्यादा लाभ नहीं मिलेगा. तो सूर्य योग से कम समय में अधिक ऊर्जा और बैठने की क्षमता मिलेगी. साथ ही शरीर की ख़राब होती हड्डियों का उपचार भी होगा. हालाँकि तब मुझे भी लगा कि बस सूर्य योग का केवल इतना ही काम होता होगा. किन्तु कुछ समय बाद एक ऐसी घटना घटी कि मेरी धारणा में बैठे सूर्य योग का सबकुछ बदल गया.  मुह खुला का खुला रह गया कि अरे क्या सूर्य विज्ञान से ये भी संभव है

   
 


















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