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वेदों का सबसे बड़ा रहस्य

posted Aug 29, 2011, 2:09 AM by Site Designer   [ updated Aug 29, 2011, 2:22 AM ]

एक बड़ी अजीब बात है कि कहा जाता है कि वेद पढ़ने के सभी लोग अधिकारी नहीं!  दूसरी बात कि वेदों को केवल आर्य पढ़ सकते हैं? तीसरा वेद श्रेष्ठों का विषय है! और आखिरी वेद ब्रह्मा जी के हाथ में स्थित है. सबसे मूल बात कि वेद अपौरुषेय ग्रन्थ है जिनको किसी पुरुष या व्यक्ति ने नहीं रचा............आप बाजार जाइये और कई प्रकाशनों के वेद मिल जायेंगे. अब तक की दुनिया की सबसे प्राचीन प्रति ऋग्वेद की है. इनको पढ़िए और अपने से पूछिए कि क्या ये वेद हैं? अब असली मामला समझिये. सबसे पहली बात वेद अपौरुषेय ग्रन्थ हैं. जिनको किसी नें नहीं लिखा. जब ब्रह्मा जी प्रकट हुए वो उनके हाथ में ही थे. तो जो आपके हाथ में वेद हैं वो क्या हैं? आप किसी भी एक वेद को पढ़ना शुरू कीजिये. आप तो पढ़ सकते हैं!  तो क्या आप वेद पढ़ने के अधिकारी हो गए. क्या आप आर्य हैं? जहन में दौड़ेगा जात-पात,पंथ-धर्म, श्रेष्ठ-निम्न आदि-आदि और गलती से आप निम्न जाती वर्ग में पैदा हुए हैं जिनको दलित के संबोधन से पुकारा जा रहा है तो आपको लगेगा मैं और आर्य? या आप इतिहास को पढ़ते हैं तो कहेंगे विदेश से आये हुए आर्य जिन्होंने द्रविड़ों को जीत कर अपनी स्थापना की? जात में आप ऊँचे हैं तो फूलने लगेंगे कि हाँ मैं आर्य हूँ. तो इन सभी मामलों में भी आप पूरी तरह गलत हैं. आर्य का शाब्दिक अर्थ कुछ है और राज कुछ और. पुरुष-स्त्री आर्य अनार्य का मामला और भी उलझन भरा. और क्या आप श्रेष्ठ हैं? बाजार से लाये वेदों को एक बार पढ़ लिया तो आप कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे.
                                                                                                 सबसे पुराने पंथ के रूप में पहचाने जाने वाला पंथ 'सिद्ध पंथ' जो गुरु गोरक्षनाथ और नव नाथों से पुराना, 84 सिद्धों से पुराना, महात्मा बुद्ध से पुराना, उससे भी पहले से चला आ रहा है वेदों के बारे में कुछ अलग ही मान्यता रखता है. मैं धर्म में बेहद रूचि रखता था और वेदों के सत्य को खोजना चाहता था. किन्तु कई प्रकाशनों के वेद और वेद पर टीकाएँ खरीद कर भी मन मानने को राजी नहीं हुआ कि मैंने वेदों को पढ़ लिया है. प्राचीन ऋग्वेद की पाण्डुलिपि की स्केन कापी भी मैंने हासिल कर ली. जब पता नहीं चला सका और संतुष्टि नहीं हुयी तो कशी चला गया. अनेक पंडितों, विद्वानों और बाबाओं से बात की पर आप तो जानते ही हैं कि आजकल इन सब लोगों के क्या हालात हो गए हैं? कुछ मालूम ही नहीं हुआ. लेकिन कहते है कि प्यासे को पानी मिल ही जाता है. मैं बस से लौट रहा था. तो एक सज्जन मेरे साथ वाली सीट पर बैठे थे. मेरे हाथों में वेद पर एक लेखक के विचारों वाली पुस्तिका थी. उनसे बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो पता चला कि हरिद्वार ऋषिकेश में कुछ विद्वान रहते हैं शायद वो कुछ सहायता कर सकें. घर आ कर कुछ दिनों बाद हरिद्वार का रुख किया साधू सन्यासियों से मिलने के बाद बड़ों के बारे में अलग-अलग राय सामने आयी. कुछ नें कहा वेदों को गूढ़ भाषा में लिखा गया है. इसलिए आम व्यक्ति नहीं समझ पायेगा. कुछ नें कहा कि वेदों की ऋचाएं सूत्रों की तरह है उसका विस्तार किये बिना उनका शाब्दिक अर्थ मान लेना घटक हो सकता है. कुछ नें इन वेदों को सिरे से ख़ारिज कर दिया कहा कि ये तो असली बेद ही नहीं हैं. किसी का तर्क था कि वेद तो अन्दर होते हैं उसके लिए ध्यान करों. कोई वेदों के गूढ़ अर्थ को समझाने लगा. यहीं गुरु गोरक्षनाथ मैथ है. मैं वहां भी गया पर बाबाओं को देख कर प्रश्न करने का मन ही नहीं हुया. एक दुबला पतला सा बाबा एक किनारे बैठा था उससे बातचीत शुरू की कि क्या यहाँ कोई वेदों के बारे में बता सकता हैं? वो हँसते हुए बोला ठीक से पूजा ही कर लें ये लोग तो बड़ा है सारे देश में हम नाथों का हाल ये है कि धन-धन्य वाले और बहुबल वाले तो मिल जायेंगे पर ज्ञान वाले व तपस्वी मिलेंगे नहीं. एक बाबा जी है उम्र में छोटे है पर वहां आप जायेंगे नहीं दूर है. मैंने कहा आप बता दीजिये. तो बोला यहाँ जो अन्दर बाबा जी बैठे हैं न, 'आनंद नाथ जी' वो इनका चेला है हिमाचल कुल्लू में रहता है. मेरे पास तो उनका पता है नहीं पर उनसे मांग लो. मैं अन्दर गया तो देखा बाबा आनंद नाथ एक चारपाई पर बैठे थे और कुछ लोग नीचे मैं भी नीचे बैठ गया और ओनसे पूछा कि क्या मुझे कुल्लू वाले बाबा जो आपके शिष्य हैं का पता मिल जायेगा? उनहोंने टीवी की और इशारा करते हुए कहा वहां देखों यही है. उस समय वहां टीवी पर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी का कर्यक्रम आ रहा था. वो तो बहुत ही कम उम्र लग रहे थे ये शायद 2006 या 07 की बात है. मुझे उनका पता मिल गया था. फिर लक्ष्य तक भी पहुँच ही गया. कुल्लू आश्रम में मेरी उनसे पहली मुलाकात हुई. बिलकुल साधारण नीचे जमीन पर एक दरी बिछये बैठे थे. जबकि मैं सोच रहा था कि कोई बड़ा आसन होगा. मैंने अपने आने का कारण बताया और पूछा कि वेदों के बारे में बताएं क्योंकि अब तो बहुत भटक चूका हूँ!




                                                                        अभी इस आलेख को स्वीकृति नहीं मिली है कुछ दिन प्रतीक्षा करें.......धन्यवाद 

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