Kaulantakpeeth & Mahayogi satyendar nath

कौलान्तक पीठ और महायोगी

posted May 30, 2011, 8:45 AM by Site Designer   [ updated May 30, 2011, 9:51 AM ]

वो हिमालय का एक अद्भुत योगी है शायद 600 साल पहले समाप्त हो चुकी भारतीय सिद्ध परम्परा का लगभग आखिरी वारिस....एक युवा जो संजोये है बहुत से अनसुलझे रहस्य......जिसे लोग सिद्ध संत कहते हैं....कहा जाता है कि हिमालय उसे अपना पुत्र मानता है....लेकिन युवा योगी ने अपने को केवल भारत का एक आम नागरिक ही बताया....हजारों सिद्ध साधू नाथ और औघड़ परमहंस जिसे अपना गौरव मानते हैं वो विचित्रताओं से भरा एक युवा है जिसे महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी के नाम से पुकारा जाता है,आपने ठीक समझा ये वही महायोगी सत्येन्द्र नाथ हैं जिन्हें कौलान्तक पीठ ने अपना पीठाधीश्वर नियुक्त किया,अनेक रहस्यमयी साधनाओं को संपन्न करके ही कोई इस पीठ का अधिपति नायक बन सकता हैं....भौतिक विज्ञान से कोसों दूर अध्यात्म का नैसर्गिक विज्ञान अंगडाइयां लेता है,पुस्तकों में लिखित ज्ञान के अतिरिक्त जो भी आध्यात्मिक रहस्य हैं वो कौलान्तक पीठ के ही पास हैं...ये वही कौलान्तक पीठ है जिसे कुलांत पीठ के नाम से जाना जाता है....जिस पीठ ने हजारों साल पहले देवी देवताओं की पहली बार पृथ्वी पर प्रतिमाएं बनायीं थी,ये वही कौलान्तक पीठ है जिसे मंत्र विद्या तंत्र योग आयुर्वेद का संरक्षक और प्रचारक कहा गया....इस पीठ का कार्य था धर्म जगत के रहस्यों को खोजना,अनसुलझे सवालों को हल करना,शायद आपको याद हो रामायण में जिस सिद्धाश्रम का विवरण है वो यही पीठ है,ये सारा संसार जनता है कि कौलान्तक पीठ का नाम लेते ही कम्कम्पी छूट जाती है क्योंकि वो बर्फीला हिमालय और कडकडाती ठण्ड हौंसला पस्त करके रख देती है....इसी कौलान्तक पीठ में आज भी 33 करोड़ देवी देवता निवास करते हैं......आज भी तपस्या के लिए सिद्धक जन केवल कौलान्तक पीठ को ही प्रमुख और पवित्र मानते हैं.....बहुत से लोग इस कौलान्तक पीठ को नीलखंड महाहिमालय उत्तराखंड आदि नामों से भी जानते हैं....योगिनियों...किन्नरियों...अप्सराओं...गन्धर्वों...देवताओं...यक्ष-यक्षिणियों....जोगिनिओं...भूतों...सहित न जाने कितनी योनिया यहाँ गुप्त रूप और प्रकट रूप में निवास करती हैं....तान्करी भाषा के ग्रंथों में इस पीठ के विवरण भरे पड़े थे...लेकिन अफसोस की बात है कि उन ग्रंथों को केवल विदेशी आक्रमणकारियों ने नहीं बल्कि इसी देश के कुछ नासमझ लोगों नें भी जला जला कर समाप्त कर दिया....जादूगरी की दुनियां में कौलान्तक पीठ वो नाम था जहाँ से विश्व के अनेक जादूगर गुरु पैदा हुए थे....तंत्र का इंद्रजालिक संसार देख कर होश ग़ुम हो जाते थे.....हठयोगियों का ईश्वर विहीन साम्राज्य देखने का साहस हर किसी में नहीं था....यज्ञों की अनूठी परम्पराएँ...कर्मकांड का अनूठा संसार था कौलान्तक पीठ....शायद आप नहीं जानते कि जो पूजा पाठ आज आप कर रहे हैं उसे बनाने का श्री श्रेय भी कौलान्तक पीठ को ही जाता है....भले ही लोग आज इस बात को स्वीकार न करें लेकिन सत्य को प्रमाणों की आवश्यकता नहीं होती...कहावत थी की गुरु जाए तो एकायामी-कौलान्तक जाए तो बहुआयामी .......अर्थात संसार के किसी भी गुरु के पास जाएँ तो वो केवल एक ही विषय में आपको परांगत बना सकता है...लेकिन कौलान्तक पीठ जा कर विद्या ग्रहण करें तो आप बहु आयामी हो सकते हैं....कौलान्तक पीठ का एक भाग वाम मार्गियों का भी था.....जिस कारण सारे सात्विक मार्गी घबराते थे...आज भी कौलान्तक पीठ की वाम मार्गी शाखा के प्रमुख उत्त्रान्चालाधिपति शंभर नाथ जी अबधूत हैं सात्विक मार्ग के महातपस्वी योगी परमहंस चिदानंद नाथ है.....रजस मार्ग के सिद्ध प्रवर्तक आज हमारे बीच कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी के रूप में हैं....सबसे प्रसन्नता की बात कि हिमालय के महासिद्ध योगी योगिराज सिद्धसिद्धांत नाथ जी महाराज के ही शिष्य कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी को तीनो में से सर्वश्रेष्ठ कहा गया है.....केवल बातों में नहीं....सिद्ध साधनाओं हाथ साधनाओं के और तीनों शाखाओं के सार ज्ञान होने के कारण ही महायोगी सर्वश्रेष्ठ कहलाये...लेकिन ये अति दुखद पहलू है कि आज कौलान्तक पीठ का नामों निशाँ तक नहीं रहा है...कौलान्तक पीठ के नाम पर बची हैं कुछ प्राचीन पांडुलिपियाँ....और महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज....उससे भी दुखद पहलू कि कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी भी कौलान्तक पीठ को बचाने में अभी तक कामयाब नहीं हो सके हैं....ये तो आप साईट देख कर ही पता लगा सकते हैं कि ये साईट किसी जानकार द्वारा नहीं तैयार कि गयी धनाभाव के कारण हम स्वयं जितना हो सके इसे तैयार कर रहे हैं जिसमें महायोगी जी की कोई विशेष सहायता नहीं प्राप्त हैं....पहले पहल महायोगी जी ने कौलान्तक पीठ को बचाने के लिए कई लोगों को जोड़ा.....उनसे हाथ पाऊँ जोड़ कर सहायता मांगी.....लेकिन यही लोग जल्द ही कुत्सित स्वार्थों के कारण महायोगी और पीठ के शत्रु बन गए...ये तो भला हो कि ऐसे लोग चुनिन्दा है...गिनाये जा सकते हैं केवल चार या पांच ही....सरकार की तरफ भी महायोगी जी ने निहारा पर बेकार.....सन 2010 तक महायोगी जी नें सबसे मिन्नतें कर कर के इस पीठ और परम्पराओं के संरक्षण की बात कही लेकिन 2011 से महायोगी जी सीधे धर्म जगत के साधकों से जुड़ कर शाश्वत विद्याओं का प्रचार कर रहे हैं........साथ ही समस्या ये भी है कि आज की भाग दौड़ वाली जिंदगी में किसी के पास समय नहीं हैं लोग जटिल साधनाओं को समझ नहीं पाते...लोग चाहते है धर्म के नाम पर बस थोड़ी देर भजन करें...नाचें...झूमें...और धार्मिक मनोरंजन हो ज्यादा से ज्यादा कथा या प्रवचन हो जाए....हो सके तो साथ ही सुरक्षा की गारंटी कोई धर्म या धर्मगुरु दे दे....और कुछ नहीं....क्योंकि वो समझते हैं कि शायद इससे ज्यादा की आवश्यकता ही नहीं है....उनको धर्म की याद बुढ़ापे में मौत को देख कर ही आती है या फिर गंभीर बिमारी की दुःख की हालत में....ऊपर से इतने धर्म गुरु और इतने सारे ग्रन्थ कि क्या करें ये हम नहीं समझ पाते तो वो क्या समझेंगे? इसलिए कौलान्तक पीठ को फिर अपने रूप में आने में समय तो लगेगा...लेकिन कौलान्तक पीठ अपने स्वरुप में फिर आएगा जरूर....और ये सिलसिला शुरू हो चुका है....महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी के अद्भुत आश्रय में रहने वाले अनेक साधक एक जुट हो कर सनातन की सबसे पुरानी पीठ को तो जिन्दा कर ही रहे हैं साथ ही
आत्मकल्याण और जीवन को सुखमय भी बना रहे हैं....मंत्र योग ज्योतिष तंत्र रसायन आयुर्वेद आदि विद्याओं का लाभ उठा कर जीवन के कष्टों को दूर कर सुखमय जीवन जी रहे हैं.....अब सबको समझ आने लगा है कि कौलान्तक पीठ क्यों इतना ज्यादा प्रचारित और पसंदीदा था....हर ओर बस कौलान्तक पीठ कि ही लहर दौड़ रही है.....ये सब आपके सहयोग से हुआ है....आज राष्ट्रीय ही नहीं अंतराष्ट्रीय स्तर पर कौलान्तक पीठ की चर्चा हो रही है.....कौलान्तक पीठ यानि के रहस्य पीठ......तो देर किस बात की आइये जाने कौलान्तक पीठ के हर रहस्य को.....जानें महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी के अद्भुत ज्ञान को....सीखें कुछ ऐसा जो जीवन की परिभाषा बदल दे....जीवन जीने की नयी चाह जगा दे...जिंदगी को जीने का लक्ष्य दिखा दे........हिमालय जो पृथ्वी पर सबसे बड़ा रहस्य है....वही महारहस्यपीठ स्वरुप पवित्र देवात्मा हिमालय ही कहलाता है दिव्य "कौलान्तकपीठ"........जहां ज्ञान अध्यात्म योग दर्शन तंत्र आयुर्वेद ज्योतिष सहित महातप का महाशक्तिस्थल है.......जिसकी रहस्यमय साधनाओं के बारे में सुनना भी रोमांचक लगता हैं.....विश्व के लगभग सभी महानतम दिव्य अवतारी कौलान्तक पीठ तक अवश्य किसी न किसी कारणवश पहुंचे ही हैं.....इसी से कौलान्तक पीठ की महानतम गरिमा का अनुमान लगाया जा सकता है.....इसी पवित्र पीठ के वर्तमान प्रखरतम पीठाधीश्वर हैं........हिमालय के सबसे दिव्य योगी कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज......हम ह्रदय से आपका कौलान्तक पीठ और महायोगी जी के रहस्यमय पवित्र संसार में हार्दिक स्वागत करते हैं.....जाने की कौन हैं महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज.....और कहाँ है कौलान्तक पीठ.....जिसकी कल्पना मात्र से साधकों एवं भक्तों के शरीर में स्पंदन होने लगता है.....परमहंस जहा विचरण को जीवन का गौरव मानते हैं.......कौलान्तक पीठ एक मात्र ऐसा पीठ स्थान है जो एक साथ सात्विक राजसिक तामसिक साधना पद्धतियों को सिखाता है....जिसका कारण है सिद्ध गुरुओं का इस पीठ को आशीर्वाद होना.....जैसे महाऋषि लोमेश जी......महाऋषि काकबुशुन्डी जी... महाऋषि दत्तात्रेय जी..कपिल मुनि जी....विभांडक ऋषि जी......मार्कंडेय ऋषि जी....भगवान् परशुराम जी....महाऋषि विश्वामित्र जी....महाऋषि वसिष्ठ जी....ममहाऋषि कश्यप जी......मुनि अगत्स्य जी.....लरकाई ऋषि जी.....दैत्यगुरु शुक्राचार्य जी.....लोपामुद्रा जी....गार्गी देवी जी...साथ ही साथ मत्स्येन्द्र नाथ जी....गुरु गोरक्षनाथ जी....नव नाथों सहित चौरास्सी सिद्धों जैसे अनेक दिव्य तेजस्वियों के कारण संयुक ज्ञान इस पीठ को प्राप्त हुआ.....लेकिन याद रहे पीठाधीश्वर बनते ही महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी ने बलि प्रथा...नशा सेवन....कुत्सित आचरण को तंत्र से बहार का रास्ता दिखा दिया है....महायोगी जी के अनुसार ये सब कालांतर में तंत्र के साथ हुई छेड-छाड़ का परिणाम हैं.....महायोगी जी नें तंत्र का शुद्ध और पवित्र रूप ही सामने लाया है...महायोगी जी ने तंत्र की वास्तविक परिभाषा दे कर डरावने शब् साधकों को.....बदबूदार औघड़ों के स्थान पर पवित्र एवं शुद्ध तंत्र साधक साधिकाओं को स्थापित किया है....तंत्र के नाम पर प्रचलित सड़ी-गली मनघडंत साधनाओं को दरकिनार कर दिव्य चक्र पूजा......आवरण पूजा......यन्त्र साधना आदि को सामने लाया......जिसका अनेक कथित तांत्रिको औघड़ों ने विरोद्ध किया....लेकिन महासंकल्पवान महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी के आगे किसी की चल न सकी...कौलान्तक पीठ से कौलाचारी साधक अलग हो गए.....जो महायोगी के महाज्ञान को न समझ सके वे वाममार्ग शिरोमणि शंभर नाथ जी महाबधूत की शरण में जा कर नए पंथ में जुड़ गए.....महायोगी ने कहा मुझे कथित तांत्रिकों की आवशयकता ही नहीं है....कौलान्तक पीठ बदनाम हो चुके तंत्र को साफ सुथरा बना कर अनेक सात्विक भैरव-भैरवियों को जोड़ेगा.....आपको बता दें कि कौलान्तक पीठ के पीठाधीश्वर की योग्यताएं आम पीठाधीश्वरों जैसी नहीं होती बल्कि बड़ी ही विचित्र हैं.....जैसे सबसे पहले अभिनय कला आनी चाहिए क्रमशः गीत.......संगीत....नृत्य.....युद्ध.....साहित्य-काव्य.....चित्रकला......वाणी विलास.....सम्मोहन.....कौतुक कला यानि जादूगरी....रहस्य कला....यानि की अज्ञात को अज्ञात के माध्यम से जानना......आयुर्वेद...शल्य...श्लाक्य...काय....नाडी...निदान...औषधि सहित.....मंत्र....सात्विक..राजसी...तामसिक तथा लिंगानुसार क्रमश: विविध मंत्र.......जैसे पुलिंग...स्त्रीलिंग....नपुंसक मन्त्रों का ज्ञान.....विभिन्न विद्या मंत्र....बीज मंत्र और स्तुति मन्त्रों सहित शाबर....देशज मन्त्रों का ज्ञान होना चाहिए.....तंत्र की पटल पूजा.....न्यास पूजा....चक्र पूजा.....यन्त्र निर्माण...यन्त्र रहस्य....वास्तु...स्थान..सहित विशवकर्मा विद्या....निर्माण विद्या.....काल ज्ञान सहित महाविद्या...योगिनी मंडल....तथा विविध ज्योतिष ज्ञान...सामुद्रिक...सहित...पक्षी जीव शास्त्र....कर्मकांड सहित वेदोच्चार...षड्दर्शन....सहित शास्त्रज्ञान....कथा ब्रत सहित तीर्थ ज्ञान....असी अनेक कलाएं...विद्याएँ......अनेक चीजें तो मैं बता ही नहीं सकता......और जानता भी नहीं हूँ......आप महायोगी जी को गाते...नाचते....लड़ते....जादूगरी करते....ये सब करते हुए स्वयं देखेंगे.......जैसे जैसे धन की कमी दूर होगी.....वैसे-वैसे आप देख पायेंगे एक ऐसा संसार....जिसे देख कर आप दांतों तले अंगुलियाँ दवा लेंगे....हमें दुःख है कि जहाँ ज्ञान होता है शायद वहां लक्ष्मी नहीं होती.....अन्यथा सीमित सा धन भी यदि पीठ के पास हो तो देश के युवा हैरान रह जायेंगे ये सब देख कर कि उनके देश में धर्म अध्यात्म आखिर इतना अद्भुत कैसे था....दुनिया ने भारत से सीखा है......आर्यावर्त से सीखा है....और भारत ने कौलान्तक पीठ में रहने वाले योगियों ऋषियों मुनियों से सीखा है.....आइये कौलान्तक पीठ को आगे बढ़ाने में अपना सहयोग दें.....स्वयम भी पवित्र मार्ग पर चलें और सभ्यता को भी नयी और परखी हुई दिशा प्रदान करें....
ॐ महाकालाय विकर्तनाय मायाधराय नमो नम:

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