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अनूठे व्यक्तित्व हैं कौलान्तक नाथ

posted May 30, 2011, 10:06 AM by Site Designer   [ updated Nov 19, 2012, 4:48 AM ]

(यहाँ पाठकों को ये बताना चाहेंगे की तुमड़ी बाबा काफी बड़ी आयु के सिद्ध योगी हैं,जो महायोगी जी को करीब चौदह सालों से जानते हैं,तथा महायोगी को अपना बरिष्ठ गुरु भी कहते हैं,क्योंकि महायोगी जी के 38 गुरुओं में से एक शान्किरी योगिनी के ये भी शिष्य हैं,ये महायोगी जी से मिलने आये हुए थे कि मुझे बात करने का सुअवसर मिल गया,इनके शब्दों को ही, जितना याद रहा, मैं लेख के रूप में दे रहा हूँ) 
                                                                                                                                                                                                                                          -कुमुदवल्ली 
-अरे लोगों के मन में साधू सन्यासी या योगियों की एक छवि होती है,लेकिन महायोगी की छवि बनाना किसी के बस में नहीं,इनका असली व्यक्तित्व तो बहुत ही छिपा और गोपनीय है, इनको कौलान्तक नाथ के नाम से हिमालयों पर इनको सब पहचानते हैं, इन विराट योगी का जीवन कई अद्भुत रहस्यों से भरा है,सबसे पहले तो ये कि सबसे पुरानी परंपरा से जुड़े हैं,ऐसी परम्परा से जिसे जानने वाले भी बहुत कम शेष बचे हैं,फिर गुप्त कुल की सभी शक्तियों की साधना कर इन्होंने साधना क्षेत्र में इतिहास कायम किया है,जिसका महत्त्व आंकने वाला कम से कम भौतिक संसार में कोई नहीं हो सकता,अपर मंडल कि 48 देवियाँ हों या परात्पर मंडल के 26 शिव,कहा जाता है कि हिमालय में लम्बा नाथ योगी, योगी हरिरस, त्रिजटा अघोरी, विशुद्धानंद, परमहंस निखिलेश्वरानंद, सुन्दर नाथ, गोला लामा , मुनि उज्जवल हंस, जैसे चुनिन्दा लोग ही परात्पर शिव कि साधना में परांगत हो सके थे, लेकिन इनमें से भी कोई अपर मंडल देवियों तक नहीं पहुँच पाया,लेकिन कौलान्तक नाथ को ये गौरव मिला है वो भी कठोर तप के बाद,कौलान्तक नाथ को आप महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज के नाम से जानते हैं,जो आम आदमी से भी साधारण लगते हैं,कभी उनको देख किसी ने ये नहीं सोचा होगा कि वो किस से बात कर रहे हैं,कौलान्तक नाथ बर्तमान भारत में साधना जगत के सर्वोत्तम रत्न हैं,लेकिन साधना काल में उनकी हठ धर्मिता ने जहाँ उनको साधना शिखर तक पहुंचा दिया वहीँ कुछ हानिया भी कौलान्तक नाथ की झोली में पड़ी, सबको सहते हुए योगी आज समाज में एक नये रूप में जीने का प्रयास कर रहे हैं,लेकिन हिमालय के सभी उच्चतम योगिओं को ये बर्दाश्त नहीं हो रहा है कि कौलान्तक नाथ यूँ भौतिक संसार में लोगों के बीच घूमें, हाल ही में हिमालय से महायोगी जी को वापिस लौटने का एक गुप्त सन्देश भेजा गया था,जिसे महायोगी ने ये कह कर नकार दिया कि मैं अभी कोशिशों में लगा हूँ, कहा जाता है कि कुल्लू में किसी पूर्व जन्म कि साधिका के पास महायोगी रहा करते थे,लेकिन उसके पुण्य समाप्त होने पर उनको मायाबश वहां से जाना पड़ा,हिमालयों से कौलान्तक नाथ के दूर जाते ही सूक्ष्म जगत में खलवली हैं,ये सूचना मैं तुमसे यहाँ सांझा कर रहा हूँ कि उनको वापिस नहीं लौटने पर महागुरु से दण्डित होना पड़ सकता है,क्योंकि कई वर्षों पहले उनको महागुरु ने कुछ काम पूरे करने को दिए थे, जिसे पूरा करने के लिए वो हर परेशानी से गुजरे,समाज नें उनसे अच्छा व्यवहार नहीं किया,तो अब महागुरु से ये देखा नहीं जा रहा,उनहोंने महायोगी को अब कहा है कि पहले बाली बातें भूल जाओ तुम लौट आओ,दरअसल महागुरु को ये भय सता रहा है कि संसार में रह कर महायोगी परेशानियों के कारण लम्बे समय तक जी नहीं पायेंगे,और शायद बहुत ही कम लोग ये जानते होंगे कि महायोगी जी अभी भी बुरे दौर से गुजर रहे हैं, जिसके कारण हिमालय की जोगिनियों में असंतोष व्याप्त है, तो ऐसे में कौलान्तक नाथ का लौटना ही बेहतर रहेगा, मैं भी इसी हक़ में हूँ, लेकिन महायोगी मांनेगे नहीं धुन के पक्के हैं,लेकिन मुझे ये बताना अच्छा लगेगा कि महायोगी अनूठे व्यक्तित्व हैं,सबसे ऐसे मिलते हैं कि मानो उनका अपना ही हो,लेकिन बदले में समाज का रुख? हालांकि महायोगी पर गुरुओं ने ज्यादा लोगों से मिलने जुलने पर पावंदी लगाई हुई है,पर महायोगी ने इसका भी हल आखिर निकाल ही लिया जब पिछले दिनों कई सालों के बाद में कौलान्तक नाथ से मिला तो देखा कि अब तो वो टीवी पर आने लग गए हैं,लोग उनको खूब मानते भी हैं गृहस्थ भक्तों की भी कमी नहीं है, लेकिन बाहर से शांत प्रसन्न दिखने वाले योगी महायोगी किंचित तनाव ग्रस्त लगे,मुझे यकीन ही नहीं होता की वाल्यकाल से अद्भुत क्षमताओं सहित पैदा हुए कौलान्तक नाथ समाज में क्या कर रहे हैं?दिव्या योगियों को उनकी आवश्यकता है,संसार में गालियाँ सुनने का ज्यादा शौक ठीक नहीं है,इससे हिमालय के योगियों को दुःख होगा,मुझे ही देख लो में इस संसार को भली तरह देख चूका हूँ,निंदा बुरे फालतू के आरोप लगाने के सिवा यहाँ लोगों को कुछ आता ही नहीं,समझेंगे नहीं तो यहाँ कई दुष्ट है कौलान्तक नाथ को तंग करना उनके लिए बाएं हाथ का खेल है,फिर बिना आश्रम और ठिकाने के इतने साल निकाल लेना भी काबिले तारीफ है,मुझ जैसे साधक को बस इतनी चिंता है की बस हमारे कौलान्तक नाथ को कोई दुःख न पहुंचे वो दुष्टों से बचे रहें,हो सके तो चुपचाप लौट आयें ताकि हम सन्यासी योगियों को उनसे दिव्या विद्याएँ ग्रहण करने का मौका मिले, मैंने इनसे शक्तिपात लिया था और कई साधनाएँ सीखी हैं अब ब्रम्ह पात पाने की इच्छा है,न जाने कब इतनी कृपा होगी कि कौलान्तक नाथ मुझे इसके काविल समझें,पर ये जरूर है कि ऐसा महापुरुष कुछ सोच विचार कर ही संसार में विचरण करता है अन्यथा इनको हिमालय से उतरने कि जरूरत ही नहीं होती,काश मैं भी इनके साथ रह सकता,कितनी बार इनसे प्रार्थना कि पर मानते ही नहीं,और मुझे इनका साथ मिल ही नहीं पाटा,मिलता है तो इतना कम कि लगता है कि कुछ मिला ही नहीं,न जाने कितनी विद्याएँ इनके पास हैं,आप लोग किस्मत वाले हैं और महायोगी के लिए तो यही कहूँगा कि वो अनूठे व्यक्ति हैं और हिमालय की शान हैं,हम सबके प्यारे हैं, 
                                                                                                                                                                                                                                          -तुमड़ी बाबा

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