Karmkand Aur Mahayogi

कर्मकाण्ड और महायोगी

posted Jun 18, 2011, 7:22 AM by Site Designer   [ updated Jun 18, 2011, 7:31 AM ]

                                                          कर्मकाण्ड आचार्य
भारत की आध्यात्मिक संस्कृति इतनी विविधता लिए हुए है कि इसे समझना बड़ा ही जटिल है, इसका एक प्रमुख भाग है "कर्मकाण्ड", कर्मकाण्ड ईश्वर की आराधना की पूर्णतया भौतिक भक्ति प्रधान प्रणाली है, इस प्रणाली को कर्मठगुरु जैसे ग्रन्थ नें एक रूपता देने की कोशिश की है, किन्तु फिर भी कर्मकाण्ड ही सबसे ज्यादा भिन्नता लिए हुए होता है, कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज कहते है कि "इसका कारण देशाचार व क्षेत्रीय परम्पराएँ हैं, दक्षिण का संगीत एवं उत्तर का संगीत भी अलग होने से मंत्रोच्चार में भी थोडा अंतर आता है, लेकिन कर्मकाण्ड तो लगभग पूरी तरह ही अलग हो जाता है, साथ ही भूमि विशेष के अनुसार भी कर्मकांड बदलता है, तंत्र भूमि पर तंत्र की प्रधानता रहती है, इष्ट की भूमि पर इष्ट की प्रधानता रहती है, गुरु की भूमि पर गुरु की प्रधानता रहती है, तपोभूमि में तप की प्रधानता रहती है, इसलिए भी कर्मकाण्ड के स्वरूपों में विबिधता है" महायोगी जी को हमने कर्मकाण्ड करते हुए लगातार देखा है, क्योंकि कौलान्तक पीठ की पूजा पद्धति में विविध कर्मकाण्ड प्रचलित हैं, इस बिधि नें पीठ की पूजा प्रणाली को चमत्कारी रूप से निखारा है, महायोगी जी को कर्मकाण्ड करते हुए देखना अद्भुत अनुभव है, प्रतिमाह कौलान्तक पीठ में कोई न कोई आयोजन होता ही रहता है, महायोगी अपनी साधनाओं के लिए निरंतर यज्ञ पूजन करते रहते हैं, जब-जब महायोगी जी कोई विशेष पूजन करते हैं, तो दृश्य मनोरम होता है, पीठ के नियमों के अनुसार महायोगी जी को विश्व शांति और विश्व कल्याण के लिए लगातार प्रार्थना एवं पूजन करते रहना होता है, और जब महायोगी पूजन करते हैं, तो विबिद्ध कर्मकांड एक ही समय पर दिखाते है 

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