गूढ़ लिपि और महायोगी

posted Jun 14, 2011, 10:52 PM by Site Designer
                                                         दिव्य लिपि 
नायक 
निगूढ़ विद्या व महारहस्यों को समझने के लिए दिव्य लिपियों का ज्ञान होना बहुत ही आवश्यक है, बहुत सी गूढ़तम जानकारियां विशेष लिपियों में लिख कर राखी जाती हैं, कौलान्तक पीत्र्हधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज कहते है, कि ब्रहमाण्ड विद्या सहित गुप्त कुल की विद्याओं को केवल एक उच्च धरातल पर पहुँच चुके साधक या योगी को ही दिया जाता है, क्योंकि इन विद्याओं को सृष्टि संचालिका कहा जाता है, यदि कोई तमस प्रधान साधक इस विद्या को ग्रहण कर ले तो ये विनाशकारी हो सकता है, साथ ही विद्याएँ अलग-अलग स्वभाव की होती हैं, इसलिए उनका लेखन किसी एक लिपि में नहीं किया जा सकता, गुणों के अनुरूप ही विद्या लिपि को चुनना होता है जो एक योग्य गुरु जानते है" साथ ही में यहाँ ये भी कहना चाहूँगा, कि इतिहासकार ये भी कहते है, कि अपने तंत्र-मंत्र को आम लोगों से दूर रखने के लिए भी इस तरह की लिपियों का प्रयोग किया जाता था, किन्तु योगियों व जानकारों नें इसे विद्याओं के अनुरूप आवश्यकता बताया है, यदि हम प्रमुख गूढ़ लिपियों की बात करें तो उनकी संख्या पांच है, १) ब्रह्म लिपि २) देव लिपि ३) भूत लिपि ४) टाँकरी लिपि ५) रहस्य लिपि आदि इनका ज्ञान होना ही इस बात को दर्शाता है कि मंत्र विद्या, और गूढ़ योग विद्या सहित तंत्र विद्या में कोई साधक किस हद तक कुशलता प्राप्त है,
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